रविवार, 17 जुलाई 2016

वक्त की धाराओ में




वक्त की धाराओ में चलो,
चलों अपनी भी नाव चलायें!!
फल का मोह छोङ दें,
डूवेगी या पार लगेगी!!
माँझी शा हुनर लिए,
धाराओ में बढते जायें!!
मुश्किल आसान नहीं,
संकल्प से बढा साहस नहीं,
वक्त की धाराओ में चलों,
चलों अपनी भी नाव चलायें!!
गिर से निकलती धारा ,
पथ आसान नहीं हैं!
सर्घष चुनौती से भरा,
गिरती उछलती खाती गोते!
रौद्ध रूप कभी निर्मल धारा!!
अपना भी पथ ऐसा होगा,
साहस के वल पर पार होना!!
कंकरीला पथरीला पथ,
मोडो का अद्भुत सफर!!
वक्त की धाराओ में चलो,
चलो अपनी भी नाव चलायें!!
ठहरार नहीं बस चलते जाना,
विपताओ को पार कर बढते जाना!!
कितने मानव जीवो का वरदान,
तृष्णा पूरा किया अहम योगदान!!
अंत में मिली सागर से ,
किया सफर अनमोल वरदान!!
हमको अपने पथ चलना,
करना हैं समाज कल्याण!!
वक्त की धाराओ में चलो,
चलो अपनी भी नाव चलायें!

जमघट

काफिलो का जमघट,
लगता हर जगह मेला!
सेनानायक शी हिम्मत नहीं,
जनता जर्नादन का लगता खेला!!
बाँध कर रखे क्यो सपने,
हुनर के दरवाजे खोल दो!!
झुकना जिसे आ गया,
पंताका उसी ने फैराया!!
हट्टाहस करती हे जनता,
हे झुकना जिसने चाहा!!
खङा रहा अहम के वंश,
एक झोका में उखङ गया!!
निर्भीक उसकी हिम्मत,
साहस उसका परिचय!!
झुकना उसका मान सम्मान,
पिघला लोहा बनता फोलाद!!
सम्मान को करे तिरस्कार,
पराक्रम से करे परास्त!!
सोच अलग थलग जिसकी,
खुद व खुद किस्से बन जाते!!
राग की धून पर प्रेम,
स्नेह लुटाना आता है!!
हर मायूस चहरे पर,
मुस्कान लाना आता है!!
द्वेष किसी से क्या करे,
छोटा जीवन छोटी बात!!
तम से घिरा हे जीवन,
रोशनी बनना हे आता!!
काफिलो के जमघट से,
एक किरण तुम भी बनो!!
झाँको खुद के अंदर ,
अच्छा क्या हे छुपा!!
आसू न दो किसी को,
मुस्कान सबकी बनो!!
एक अध्याय ऐसा लिखो,
जिस पण नाज सब करे!!
बन जाये बंदगी सबकी,
जिंदादिल कहाणी लिखो!!
काफिलो के जमघट से,
एक किरण तुम भी बनो!!
झाँको खुद के अंदर,
अच्छा क्या हे छुपा!!

तुम चलो हम चलें...

तुम चलो हम चले,
एक नया राग बनाते चले!!
मायूस हर चहरे पर,
उम्मीद की मुस्कान लाते चले!!
दीपक से दीपक जलाते चले,
तूटे सपनो को आस बधाँते चले!!
अकेली हूँ उम्मीद के पथ पर,
सहयोग से काफिले बनाते चलें!!
तुम चलो हम चले ,
एक नया राग बनाते चले!!
लाचार वेबस ताकती आँखे,
सहारा से लङी बनाते चलें!!
मादकता जाल को त्यागे,
कर्मषठ लोह जलाते चले!!
वंजर जमीं में भी हम,
उम्मीद के फूल खिलाते चलें!!
तुम चलो हम चलो,
एक नया राग बनाते चलें!!
हर गृह में दुख अपार हैं,
हर दुख को साझा करते चलें!!
उम्मीद की प्रेणा बनकर,
गिर पर भी राह बना चलें!!
पत्थरो को भी जान देकर,
अमृत धारा निकाल चलें!!
तुम चलो हम चले,
एक नया राग बनाते चलें!!
हार उम्मीद का अंत नहीं,
अमावस्या के बाद पूर्णिमा दिखा चले!!
घनघोर निशा के बाद,
अरूणिमा बिखेर चले!!
सोंच शून्य पर? नहीं,
प्रश्नो का अम्भार बना चले!!
शिथला लङखङा रही उम्मीद,
होशलो से ऊर्जा भर चलें!!
कंकरीला पथरीला काँटो का पथ,
लक्ष्य केन्द्रित सिखा चलें!!
आखरी श्वास लहू बाकी ,
उम्मीद की आस दिखा चलें!!
गरीब की कुटिया धन से नहीं,
मन चेतना से अमीर बना चलें!!
फुटपाथ पर भविष्य मांगता भीख,
बाजूबल मेहनत का पाठ सिखा चलें!!
भूखे लाचार को रोटी दे,
कमाने के हुनर सिखा चलें!!
सुख दुख मिल कर वाँटे,
एक अलख ज्योति चला चलें!!
तुम चलों हम चलें,
एक नया राग बनातें चलें!!