मंगलवार, 2 फ़रवरी 2021
(तृतीय अंक नंदी महाराज)
(तृतीय अंक नंदी महाराज)
स्वप्न टूटने के बाद ,ललाट पर हल्की-हल्की पानी की बूदें ,उठकर बैठा और तकिए को पीछे लगाया , रात्रि के स्वप्न को पुनरावृति करने का प्रयास करने लगा।सोंचने लगा,मैं दुर्राचारी था अत्याचारी था।हाँ मैं नास्तिष्क हो सकता हूँ लेकिन विध्वसकारी होना तो सभ्यता का विनाश हैं।मैंने प्रजा का शोषण ही किया है,मैं खतनांक,खूँखार जालिम था।महात्मा ने ठीक ही कहाँ था,कि श्राप वरदान ह्रदय से निकली आवाज़ का प्रतिनिधी करता हैं।मेरे कर्मो का फल का स्वरूप ही श्राप हैं।चार नवजात शिशु को काल के ग्रास में जाना श्राप का ही प्रतिफल हैं।पहला शिशु खोया तो यह समझकर नज़र अंदाज कर दिया कि उपचार सम्बन्धित कमी रह गई होंगी।आगाज से ही उपचार कराता रहा किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं थी लेकिन जन्म के बाद अक्समात शिशु का चला जाना ,न चाहते हुए भी कारक और कारण की पहेली को खोजन की जिज्ञाशा भयभीत में बदल गई।चार शिशु को खोना,किलकारी काँनो में गूंजने की अपेक्षा काल की भयभीत आव़ाजे सुनाई देती हैं।
कारक और कारण की पहेली के चक्रव्यूय से निकलने का मार्ग तो मिल चुका था,मार्ग में बढ़ना शेष था।यह सोच ही रहा था तभी सम्भावना चाय लेकर आई:-आप को चाय गर्म ही पीने की आदत हैं।आपके ललाट पर चिन्ता की रेखाएँ क्यों दिखाई दे रही हैं।आपके व्यवहार में परिवर्तन देखकर बहुत अच्छा लगा।उस महापुरुष को बहुत-बहुत धन्यावाद देना चाहती हूँ जिसने नास्तिक को आस्तिक बना दिया।हम तो तर्क- वितर्क,समझा कर थक चुके थे।हर बार हमारे बीच झगडा़ का कारण ईश्वर की साधना के प्रति मतभेद होता रहा है।कोटि -कोटि धन्यवाद देती हो महात्मा जी को।आप चिन्तित क्यों है अब क्या कारण हैं?
अवनीश:-कुछ नही!सोचा फिर कहाँ," सम्भावना !कर्मो का फल मिलता है ,क्या ऐसा सच में होता है?"
सम्भावना:-आप ने ऐसा क्यों पूछाँ?
अवनीश:-महात्मा ने कहाँ था,कि व्यक्ति को कर्मो का फल मिलता हैं। हमारी चार संतान हुई और चारों शिशु की किलकारी भी न सुन सका,यह सब हमारे कर्मो का फल है जो श्राप बनकर किसी भी जन्म में पीछा नहीं छोडे़गा।हमको मिलकर प्रयत्न करना होगा ,गलतियों को सुधारना होगा तब ही श्राप से मुक्ती मिलेगी।
सम्भावना:-ऐसा क्या करना होगा?जिससे श्राप से मुक्ती मिल जायें।
अवनीश:-आज रात्रि के स्वप्न से महात्मा के द्वारा कहे गये कथन सच हो रहे हैं।कहकर रात्रि के स्वप्न को बिस्तार पूर्वक कह सुनाया।
सम्भावना ने गहरी सांस ली.......क्या करना है?
अवनीश स्वप्न में उस गाँव का चित्रण प्रकट हुआ है,वहाँ जाना और अपने कर्म को सुधारना ही होगा।
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अपने गलती को सुधारने निकल पढ़े।चार सौ किलो मीटर का सफ़र तय करना था।अवनीश और सम्भावना मधुर संगीत सुन रहे है और गाडी़ सरपट दौड़ रही हैं।अचानक सामने गिरा हुआ पेड़ नज़र आया,ब्रेक लगा दिए।हल्की-हल्की बरसात भी हो रही थी।भयभीत होने लगें ,आसपास और कोई नहीं था।दोंनो भयभीत होने लगें....डरते -डरते अवनीश निकला और दबे पाँव धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा,पेड़ गिरने के कारण आगे जाने का रास्ता बंद हो चुका था।सम्भावना गाड़ी के अंदर ही थी,अब करे तो क्या करें,अवनीश भी गाडी़ में आ गया।
अवनीश:-आगे जाने का रास्ता बंद हो चुका है,अब क्या करें।शाम तक गाँव में पहुँचना ही होगा।अंजान रास्ता है अंजान शहर है,ऐसे किसी पर भी विश्वास करना मुसीबत को निमंत्रण होंगा।
सम्भावना:-करें तो क्या करें?यहाँ मोबाईल सिग्नल भी नहीं आ रहे कि गूगल करके दूसरा रास्ता भी खोज लें।कैसे भी करके यही से आगे जाने के लिए रास्ता बनाना होंगा।
अवनीश:-हम दोनों क्या कर सकते हैं?
सम्भावना:-दृढ़ विश्वास हो तो कुछ भी कर सकते है,हमको मिलकर पुरूषार्थ करना ही होगा।सफ़र पर निकललने से पहले हमने आवश्यक सामान एकत्रित करके रख लिया था।इस समय हमारे पास जो भी सामान उपलब्ध है ,उसका ही उपयोग करके रास्ता बनाना होगा।
अवनीश:-क्या-क्या सामान लाई हो?
सम्भावना:-यह टूल बाक्स है,देखो क्या है,क्या काम में आ सकता हैं।
उस टूल बाक्स में,छोटी सी टुकड़ो में भिभाजित कुल्हाडी,छोटी सी कटर मशीन,कुदाल,इत्यादि आवश्यक सामान था।कटर मशीन को चलाने के लिए बिजली चाहिए,लेकिन कहाँ से आयें।कटर मशीन को बैटरी से चलाया जाता हैं।वाहन में बैटरी तो होती ही हैं।उस बैटरी की ही सहायता से कटर मशीन को चलाया जाता हैं।दोंनो ने अपनी सूझ-बूझ से,टूल बाक्स के उपकरणो का प्रयोग करके,समस्या का निराकरण कर लिया।इस कार्य में एक घंटा का समय लगा।लम्बा सफ़र था अनचाह मुश्किलों से बचने के लिए।सफ़र से निकलने से पहले गाड़ी की सर्विस कराई,आवश्यक बस्तुओं को जमा करके रखा।गाडॆी की टक़ी फुल कराने के बाद भी पैट्रोल को लेकर रखा।गाडी सी एन जी और पैट्रोल से चलती थी।खाने -पीने का सामान भी रखा था।सफ़र पर निकलने से पहले रणनीति बनाई ,क्या-क्या सामान ले जाना चाहिए,किस-किस की आवश्यकता पढ़ सकती हैं।गाँव पहुँचने से पहले कही और रुकना न पड़े।अंजान सफ़र पर किसी पर विश्वास नहीं कर सकते हैं।अचानक समस्या आ मिली लेकिन धैर्य और शाहस से उसका भी निराकरण कर लिया।और आगें निकल पढ़ें।सुबह से लगातार चल ही रहे थें।सरकारी बस सेबा का बुक डिपो देखा वहाँ पर खड़ी करके आधा घंटा आराम किया होगा।किसी को भी अपने सफ़र से परिचय न कराया कहाँ जाना है किस कार्य से,सफ़र में मिलने बाले मुसाफिरों से कभी भी कहाँ जा रहे है किसलिए जा रहे है,चर्चा नहीं करनी चाहिए।सरकारी बुक डिपो के बाद यहाँ पर मुश्किल के कारण रुकना पड़ा। बरसात हो रही थी इस कारण से वाहन कम चल रहे थें।
ऐसा नहीं था कि इस सड़क पर कम चहल-पहल होती है।हमेशा व्यस्त रहने बाली सड़क पर एक घंटे तक अन्य कोई साधन सवारी न आई यह भी एक आश्चर्य था।जैसे ही दोंनो ने रास्ते से पेड़ हटा दिया कि साधनो का रेला चला आया।एक घंटे के अंतराल तक किसी का न आना संयोग था या कुछ और था।दोनों ने अपनी सूझ-बूझ से रास्ता खोल दिया,यह परीक्षा ही थी।
चलते-चलते गाँव की सीमाओ में प्रवेश करने से पहले,अचानक तूफान के साथ मूसलाधार बारिस होने लगीं।ऐसा प्रतीत होता था कि कोई शक्ति आगे जाने से रोक रही थी।अवनीश अवरोध को हटाकर जाने का प्रयास कर रहा था,तीसरा गैर भी डाल दिया लेकिन आगे जाने की बजाय,टायर वही पर फिसलने लगें।सम्भावना ने गाड़ी को बंद कर दिया।
अवनीश:-गाड़ी बंद क्यों कर दी?गाँव की सीमा में प्रवेश करना ही होंगा।
सम्भावना:-आपको क्रोध से नही धैर्य और शाहस से प्रत्येक समस्या का निराकरण करना है।आप अभी भी नहीं समझ पा रहे है कोई दिव्य शक्ति है जो आगे जाने से रोक रही हैं।आप स्वयं नहीं देख रहे,अचानक तूफा़न के साथ मूसलाधार बारिस आ गई। आपने बहुत प्रयास किया लेकिन एक इंच भी आगे नहीं बढ़ सकी हैं।समझो अदृश्य शक्ति अवरोध उत्तपन्न कर रही हैं। हमको यही रूकना चाहिए,समस्या उत्तपन्न हुई है तो निराकरण भी होगा।
अवनीश ने गाड़ी को पीछे करके एक तरफ़ कर लिया।:-क्या सोंचा था कि शामतक गाँव में प्रवेश कर जायेगें,लेकिन सोंचने से होता क्या है,होगा वही जो प्रभू की इच्छा।गाड़ी को एक तरफ़ लगाया कि तूफा़न और बरसात भी शान्त हो गई।
सम्भावना:-आपके मुख से प्रभू इच्छा सुनकर अच्छा लगा।आज से पहले यही कहते थे होगा वही जो मैं चाहूँगा।
अवनीश:-तब में और आज में अंतर हैं।मैं जान चुका हूँ,प्रभू इच्छा से एक पत्ता भी हिल नहीं सकता हैं।अगर ऐसा होता तो मैं आज निसंतान न होता।
सम्भावना:-बीते कल को ही ठीक करने निकले हैं।
बातों -बातो में कुछ समय गुजर गया..अवनीश:-सम्भावना कुछ खाने को दों।
सम्भावना:-ठीक है।पराठो को सॉस के साथ दिया...लो।
अवनीश और सम्भावना पीछे बैठे हुए थें।जैसे ही अवनीश ने खाने के लिए निवाला तोड़कर मुख में रखना चाहा,वैसे ही किसी ने दरबाजे के शीशे पर ,हाथ की थाप बजाई...थप थप ।
अवनीश ने सम्भावना को ऊँगली से शान्त होने को कहाँ,फिर शीशे को हल्का सा नीचे किया।तो देखा दो छोटे-छोटे बच्चे खाने के लिए कुछ याचना कर रहे थें। अवनीश ने देखा तो स्नेह उमड़ पड़ा और अपना और सम्भावना का भोजन बच्चों को दे दिया।बच्चे भोजन लेकर चले गयें।गाँव की सीमा पर कुछ दुकाने भी थी जिसपर सामान लेने बालों को देखा जा सकता था।अचानक दुकान बाले शौर करने लगें,कह रहे थे बाहर रहने बाले दुकान में शरण ले लो।यह बैल खूँखार है,इसके रास्ते में जो भी मिलता है उसको उठाकर पट़क देता हैं।इस बैल के मार्ग में अवरोध उत्तपन्न न करें ,यह जहाँ जाना चाहता है स्वेच्छा से जाने दें।
दोनों अपनी गाडी़ में ही बैठे थे कि अचानक तूफा़न जैसा प्रतीत हुआ ,शीशे से देखा तो बैल था जिसने सींगो से प्रहार करके गाडी को पलट दिया,अवनीश ने शाहस करकें शीशे को नीचे किया और पहले स्वयं निकला और सम्भावना को निकालना चाहता था,उससे पहले बैल ने अवनीश को सींगो पर उठ़ा लिया और इधर -उधर दोड़ने लगा।सम्भावना अंदर ही थी...अंदर से ही बचाओ-बचाओ आवाज लगा रही थी।
सम्भावना ने बचाओ-बचाओ आवाज को शान्त किया और एक गहरी सांस ली और स्वयं प्रयास करके खिड़की से बाहर निकली।अवनीश से कहने लगीं,जो बैल के सींगो पर था, बैल गिराने का प्रयास कर रहा था लेकिन अवनीश ने कसकर सीगों को पकड़ लिया।सम्भावना बैल के आगे आकर अवनीश को कुछ कहने का प्रयास करने लगी।अवनीश सम्भावना से मार्ग से हटने को कह रहा था और सुरक्षित स्थान पर जाने को कह रहा था.
अवनीश:-सम्भावना जाओ,दुकान में शरण ले लों।जाओ जाओ,मार्ग से हट जाओ।
बैल सम्भावना के सामने से हटकर दूसरे मार्ग की तरफ़ चला जाता।अवनीश और बैल म़े एक संर्घष हो रहा था अवनीश ने कसकर सींग पकड़ लिए थे।बैल अवनीश को गिराने की कोशिश कर रहा था।दोंनो में संर्घष चल रहा था।
सम्भावना:-अवनीश अवनीश सोचों सोंचो। यह तुम्हारी परीक्षा है।मैं बैल के मार्ग में ही हूँ फिर भी मुझको हानि पहुँचायें अलग मार्ग में चला जाता है क्यों?सोंचो सोचों।यह साधारण बैल नहीं है।महादेव का वाहन है,सबारी हैं।इसको शान्त करने का एक ही मार्ग है।अपने गले की रुद्धाक्ष बैल के सीगों में डालने का प्रयास करों।
सम्भावना की बात को सुना ।जैसा कहाँ था बैसा ही किया।बैल ने अपने सीगों से उछाल कर पास के खेतों में फैक दिया और बैल चला गया।सम्भावना अवनीश के पास गई।व्याकुल थी आँखो से अश्व झल़क आयें।अपने हाथ का सहारा देकर उठाना चाहा।अवनीश भी उठना चाह रहा था कि अचानक हाथों के नीचे कोई बस्तु का एहसास हुआ।
अवनीश:-सम्भावना सम्भावना यहाँ कुछ हैं।
सम्भावना:-क्या है?और नीचे झुक गई।छूकर देखा।
दोनों ने आसपास की मिट्टी हटाकर देखी तो नंदी जी की प्रतिमा थी।दोनों ने बाहर निकाला तो आसपास के लोग भी एकत्रित हो गयें।जय हो नंदी महाराज।यह तो चमत्कार हो गया।लोग कह भी रहे थे,शायद अब इस गाँव से श्राप दूर हों।जय हो नंदी महाराज।जय हो नंदी महाराज।
(तृतीय अंक समाप्त)