रविवार, 16 अप्रैल 2017

वजूद

मेरे   वजूद पर अंकुश ,    
लगाने का सुनाते है फरमान!!
सांस लेने पर प्रतिबंध जैसे,
संसार पर हम है भार!!
न लव्ज न सोंच न स्वप्न,
विन आत्मा है पाषाण!!
लेखक की आत्मा पर प्रहार,
खुद के होने पर लगता ?
कागज़ बिन कलम अंधूरे,
जैसे सागर बिन नीर!!
अरदास विन रघुराज,
जैसे नैना विन सपना!!
लेखक विन इतियास,
शब्द ने दिया है प्रमाण!!
कौन थे रघुराज राम ,
रामायण है साक्ष्य प्रमाण!!
न होते जो तुलसीदास ,
घर घर कैसे होता संत्कार!!
वजूद को विराम देने से पहले,
खुदके अभिनय का करो दर्शन!!
और माँगे तुमसे तुम्हारा वजूद,
तव कैसा लगता है प्रतिघात!!
लेखक बनाना उसका है हक,
उसके हक़ पर किया कैसा वार!!
लेखक के नैनो की धार में छुपी,
राम के संकल्प पर प्रतिघात!!
जिसपर बरसाये अपना अमृत,
उसपर होता है लेखक का हक!!
न कभी खुदसे लिखने का हुनर ,
राम ने दिया है हमको यही दान!!
उसकी नज़र है तव ही मेरी कदर,
इस कदर  को वेकदर का नहीं हक!!
ज़िंदगी जीने का सलीका दिया,
अपने रहम से हमको अपना लिया!
किसी के वजूद को वदलने से पहले,
एक वार खुद के दर्शन कर लेना!!
जो हिदायत हमको दी है ऐसी,
ऐसी हिदायत देने वालो की नहीं कमीं!!
जव तक चायेगे राम तक चलेगी कलम,
लब्ज भी उसके सोंच भी उनकीं,
हमतो एक मात्र जरिया है !!
चायेगे राम तब तक चलेगी कलम!!!

शनिवार, 15 अप्रैल 2017

ked kr lo

ठहर जायें नज़र ये इल्म जानती हो..
हो जायें काफिर ये कशिश जानती हों..
तेरे दरिमियान आँके सुध भूल बैठा हूँ,
ठहरी नज़र है जग भूल वैठा हूँ!!
पहले विंदाश अलबत्ता परिदां था,
तेरी मुडेंर का रहनुमा परिदां हूँ!!
तेरी एक झलक का अक्स ढूँडता हूँ,
वार वार बस तुझमें ही तुझको ढूँडता हूँ!!
ज़िंदगी क्या है?आज सवव जानता हूँ,
तुझ विन अंधूरी किताव हिस्सा मानता हूँ!
तू हुई मेरी मंजिल....मैं तेरा राही.....
तुझसे ज़िंदा हूँ ......मैं तेरा राही...
तलब किया इजहार किया सौ वार कहाँ,
तेरी खामोशी वार वार हाँ की तरफ़ जायें!
लव्ज को इजहार करने का फरमान दो,
मैं व्याकुल हूँ सुनने  का रसपान दों!!
मुस्कराके चली जाना दूर से पलट जाना,
तिरछी नजरों से बिन कहें हाल बयाँ करना!
खामोशियो में तेरा आशिकाना पंसद हैं,
शकून  मिल जायें बस लव्जो हाल बयाँ कर दो!
इस पंरिदो को अपने पिजडे में ग़ुलाम कर लो,
उमर भर तेरी छाँव का रहनुमा पंरिदा रहूँ!!
बस और क्या?
इस हस्ती को अपनी हस्ती में शामिल कर लो!!
बस और क्या?
इस हस्ती को अपनी हस्ती में शामिल कर लो!!
तू ही मेरी मंजिल....मैं तेरा राही...
तुझसे ही ज़िंदा हूँ...मे तेरा राही...