मेरे वजूद पर अंकुश ,
लगाने का सुनाते है फरमान!!
सांस लेने पर प्रतिबंध जैसे,
संसार पर हम है भार!!
न लव्ज न सोंच न स्वप्न,
विन आत्मा है पाषाण!!
लेखक की आत्मा पर प्रहार,
खुद के होने पर लगता ?
कागज़ बिन कलम अंधूरे,
जैसे सागर बिन नीर!!
अरदास विन रघुराज,
जैसे नैना विन सपना!!
लेखक विन इतियास,
शब्द ने दिया है प्रमाण!!
कौन थे रघुराज राम ,
रामायण है साक्ष्य प्रमाण!!
न होते जो तुलसीदास ,
घर घर कैसे होता संत्कार!!
वजूद को विराम देने से पहले,
खुदके अभिनय का करो दर्शन!!
और माँगे तुमसे तुम्हारा वजूद,
तव कैसा लगता है प्रतिघात!!
लेखक बनाना उसका है हक,
उसके हक़ पर किया कैसा वार!!
लेखक के नैनो की धार में छुपी,
राम के संकल्प पर प्रतिघात!!
जिसपर बरसाये अपना अमृत,
उसपर होता है लेखक का हक!!
न कभी खुदसे लिखने का हुनर ,
राम ने दिया है हमको यही दान!!
उसकी नज़र है तव ही मेरी कदर,
इस कदर को वेकदर का नहीं हक!!
ज़िंदगी जीने का सलीका दिया,
अपने रहम से हमको अपना लिया!
किसी के वजूद को वदलने से पहले,
एक वार खुद के दर्शन कर लेना!!
जो हिदायत हमको दी है ऐसी,
ऐसी हिदायत देने वालो की नहीं कमीं!!
जव तक चायेगे राम तक चलेगी कलम,
लब्ज भी उसके सोंच भी उनकीं,
हमतो एक मात्र जरिया है !!
चायेगे राम तब तक चलेगी कलम!!!
लगाने का सुनाते है फरमान!!
सांस लेने पर प्रतिबंध जैसे,
संसार पर हम है भार!!
न लव्ज न सोंच न स्वप्न,
विन आत्मा है पाषाण!!
लेखक की आत्मा पर प्रहार,
खुद के होने पर लगता ?
कागज़ बिन कलम अंधूरे,
जैसे सागर बिन नीर!!
अरदास विन रघुराज,
जैसे नैना विन सपना!!
लेखक विन इतियास,
शब्द ने दिया है प्रमाण!!
कौन थे रघुराज राम ,
रामायण है साक्ष्य प्रमाण!!
न होते जो तुलसीदास ,
घर घर कैसे होता संत्कार!!
वजूद को विराम देने से पहले,
खुदके अभिनय का करो दर्शन!!
और माँगे तुमसे तुम्हारा वजूद,
तव कैसा लगता है प्रतिघात!!
लेखक बनाना उसका है हक,
उसके हक़ पर किया कैसा वार!!
लेखक के नैनो की धार में छुपी,
राम के संकल्प पर प्रतिघात!!
जिसपर बरसाये अपना अमृत,
उसपर होता है लेखक का हक!!
न कभी खुदसे लिखने का हुनर ,
राम ने दिया है हमको यही दान!!
उसकी नज़र है तव ही मेरी कदर,
इस कदर को वेकदर का नहीं हक!!
ज़िंदगी जीने का सलीका दिया,
अपने रहम से हमको अपना लिया!
किसी के वजूद को वदलने से पहले,
एक वार खुद के दर्शन कर लेना!!
जो हिदायत हमको दी है ऐसी,
ऐसी हिदायत देने वालो की नहीं कमीं!!
जव तक चायेगे राम तक चलेगी कलम,
लब्ज भी उसके सोंच भी उनकीं,
हमतो एक मात्र जरिया है !!
चायेगे राम तब तक चलेगी कलम!!!