ठहर जायें नज़र ये इल्म जानती हो..
हो जायें काफिर ये कशिश जानती हों..
हो जायें काफिर ये कशिश जानती हों..
तेरे दरिमियान आँके सुध भूल बैठा हूँ,
ठहरी नज़र है जग भूल वैठा हूँ!!
पहले विंदाश अलबत्ता परिदां था,
तेरी मुडेंर का रहनुमा परिदां हूँ!!
तेरी एक झलक का अक्स ढूँडता हूँ,
वार वार बस तुझमें ही तुझको ढूँडता हूँ!!
ज़िंदगी क्या है?आज सवव जानता हूँ,
तुझ विन अंधूरी किताव हिस्सा मानता हूँ!
ठहरी नज़र है जग भूल वैठा हूँ!!
पहले विंदाश अलबत्ता परिदां था,
तेरी मुडेंर का रहनुमा परिदां हूँ!!
तेरी एक झलक का अक्स ढूँडता हूँ,
वार वार बस तुझमें ही तुझको ढूँडता हूँ!!
ज़िंदगी क्या है?आज सवव जानता हूँ,
तुझ विन अंधूरी किताव हिस्सा मानता हूँ!
तू हुई मेरी मंजिल....मैं तेरा राही.....
तुझसे ज़िंदा हूँ ......मैं तेरा राही...
तुझसे ज़िंदा हूँ ......मैं तेरा राही...
तलब किया इजहार किया सौ वार कहाँ,
तेरी खामोशी वार वार हाँ की तरफ़ जायें!
लव्ज को इजहार करने का फरमान दो,
मैं व्याकुल हूँ सुनने का रसपान दों!!
मुस्कराके चली जाना दूर से पलट जाना,
तिरछी नजरों से बिन कहें हाल बयाँ करना!
खामोशियो में तेरा आशिकाना पंसद हैं,
शकून मिल जायें बस लव्जो हाल बयाँ कर दो!
इस पंरिदो को अपने पिजडे में ग़ुलाम कर लो,
उमर भर तेरी छाँव का रहनुमा पंरिदा रहूँ!!
बस और क्या?
इस हस्ती को अपनी हस्ती में शामिल कर लो!!
बस और क्या?
इस हस्ती को अपनी हस्ती में शामिल कर लो!!
तू ही मेरी मंजिल....मैं तेरा राही...
तुझसे ही ज़िंदा हूँ...मे तेरा राही...
तेरी खामोशी वार वार हाँ की तरफ़ जायें!
लव्ज को इजहार करने का फरमान दो,
मैं व्याकुल हूँ सुनने का रसपान दों!!
मुस्कराके चली जाना दूर से पलट जाना,
तिरछी नजरों से बिन कहें हाल बयाँ करना!
खामोशियो में तेरा आशिकाना पंसद हैं,
शकून मिल जायें बस लव्जो हाल बयाँ कर दो!
इस पंरिदो को अपने पिजडे में ग़ुलाम कर लो,
उमर भर तेरी छाँव का रहनुमा पंरिदा रहूँ!!
बस और क्या?
इस हस्ती को अपनी हस्ती में शामिल कर लो!!
बस और क्या?
इस हस्ती को अपनी हस्ती में शामिल कर लो!!
तू ही मेरी मंजिल....मैं तेरा राही...
तुझसे ही ज़िंदा हूँ...मे तेरा राही...
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