शनिवार, 18 नवंबर 2017

होती साकार आशायें

सोशल मीडिया हृदय को गति दे,
वो जीवन दायनीय नेट संचार हे।
सूखे पढे वृक्षो पर कली खिले,
उम्मीद चमकाने का श्रोत है।।
दाम दण्ड भेद से सोशित मनु,
जन जन तक सम्पर्क सुलभ है।
बस एक सवूत ही आधार है,
विद्धुति प्रकाश विखेरता अद्भुत है।।
आम की भी आशा खाश हे,
दृश्यम से शुशोवित अभिनेता हे।
रुप ओर अदाओ का समावेश,
घर 2 बसता अभिनय का संगम है।।
चुप्पी और लाज को छोडकर ,
हृदय में गुलाटी मारती कुंज है।
छुपी प्रतिभाओ का होता आदान प्रदान है,
मिला खुला रंगमच अद्भुत खिलती कलायें है।।
सिसकती कोसती खो जाती वास्तविकता,
नेता, अभिनेता, गायक, कवि इत्यादि।
शिक्षा,सास्कृतिक,क्रयाशीलता घुमडती,
सबकी आशाओ में महकती मेघ हैं।।
प्रेम के अंकुर को फलाती राश है,
एक छोर से उसपार छोर तक जाती।
अभिवेदना विचारो का होता समागंम है,
भिन्न देश,भिन्न सास्कृतिक होता पाणिग्रहण है।।
विवेक,चेतना, रहस्यमय, जागृति होती आत्मा,
स्वंय चिन्तन मनन सोर्यमय प्रज्ज्वलित होती।
साक्ष्य प्रमाण की तय तक जाती ज्ञानेद्रियाँ,
स्वयं विकल्पों से  परेह लेती फैसला।।
हानिकारक.......
वैठे है मस्तिष्क को शून्यहीन की चाल में,
मस्तिष्क पर पंग डालू करु नियंत्रण में।।
जैसा मैं चाहूँ जी हजूरी कराऊँगा।
न दिखलाऊँगा फिर भी मन भटकाऊँगा।।
देश के देश में सपोले को जगाऊँगा, 
वैठकर मैं वंदो को वंदो से झगडाऊँगा।।
मस्तिष्क पर पंग है मेरा जिहाद रचाऊँगा,
देश को देश के वंदो  से ही लडाऊँगा।।
मस्तिष्क में पडौसी षड़यंत्र रचायें वैठा है,

व्लू व्हेल गैम के पीछे शादिश छिछोरी है।।
आत्मदाह का खोपनाक खेल विकराल हो,
मानव वम्व वनाके  स्लीपल सैल वनादे।।
देश भी अपना देशवाशी भी अपने है,
अपनो में जघन्य खेल खेलता दुशाशी हैं।।
वाल्यकाल की अवस्था पर पानसाईड दुराचारी है,
अवस्था चायें कोई भी हो विचलित की भम्रमारी है।।
विश्वामित्र की तपस्या में विध्न अतियारी था,
मानव की चेतना पर यह पहरा भटकाता है।।
रिश्तों की मर्यादाओ को छिन्न भिन्न कर जाता है,
विश्वास पर प्रश्न चिन्ह घृणाशील बना जाता है।।
विचलित क्यों होते हो?भ्रम के अधीर क्यो होते हो?
यह तो व्रह्मा ने  काया में गुण अवगुण समावेश है,
हर वस्तु में दो गुण एक में ही समावेश है।।
जिसका अनुसरण कर लोगे वही निखर जायेंगा,
ईख की परिभाषा से पारितोषित करते है।
ईख से निकले रस से वनी मिठाई का उपभोग करो,
ईख से निकले रस से वनी मधुशाला देह त्याग करो।।
सोचो सोचो......निर्णय है तुम्हारा....
हम तो एक ही वात जाने है,
शोसल मीडिया हृदय को गति दें,
वो जीवन दायनीय जीवन संचार है।।
सरल सुगम आदान प्रदान करे ,
स्वप्न से साक्षातकार करे नेट संचार है।।
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