रविवार, 14 अप्रैल 2019

राज नज़र आते हैं

दिल के आयने में राज नज़र आते है,
जब जब देखता हूँ आयना,
स्वयं के किरदारों में,
उलझते फंलसा नज़र आते है।।
जिंदगी के राग में उलझी सी जिंदगी,
सुरों के सरताज में मुग्धं,
अनकहे से किस्सो में ,
क्यों अपना ही किस्सा नज़र आता हैं।।
दिल के आयने में राज नज़र आते हैं....
चढ़ते ढ़लते सूरज के मनुहार वेला में,
कश्मकश सी अपनी हस्ती,
क्यों शादिशों के शिकार में,
क्यो अपना ही प्रतिबिम्भ नजर आता हैं।।
दिल के आयने में राज नज़र आते हैं...
सागर की मोझे उफनते सैलाब में,
भंवर की निर्दयता में,
फँसी अपनी  कस्ती सी,
क्यों निर्दयता का शिकार  नजर आता हैं।।
दिल के आयने में राज नज़र आते हैं....
प्रकृति के रहस्यों के संसार में,
मंनमुग्ध पुष्पों का जाल हो,
रहस्यमय बूटियों की माया हों,
क्यों रहस्यमय प्रतिबिम्भ नजर आता हैं।।
दिल के आयने में राज नजर आतें हैं...
जब जब देखता हूँ आयना,
स्वयं के किरदारों में,
उलझतें फंलसा नजर आतें हैं।।






शुक्रवार, 8 मार्च 2019

मैं परिभाषा हूँ

संकल्प की धारा हूँ,
निर्मल जल धारा हूँ,
पंथ की अवतार हूँ,
विषम की रसधार हूँ।
मैं औरत स्वाभिमान हूँ।।
विचलित मार्गो का द्वार हूँ,
पुःउत्थान का उद्धार हूँ,
अधर्म का नाश हूँ,
धर्म का युगमान हूँ,
क्षीण में शक्तिमान हूँ,
मैं औरत परिर्वतन हूँ।।
बंधनो का संगम हूँ,
शक्ति का परिचालक हूँ,
अशुद्ध में शुद्ध हूँ,
कृति में प्रकृति हूँ,
तत्व में धरा हूँ,
धरा में सम्माहित हूँ,
श्रृष्ठी का संचालन हूँ,
मैं औरत परिपूर्ण हूँ।।
अंलकार का श्रोत हूँ,
उपहार में प्रेम हूँ,
सौन्दर्य का स्वरुप हूँ,
कविता का मान हूँ,
शून्य में साहश हूँ,
तत्वों का स्वामित्व हूँ,
मैं औरत साधना हूँ।।
अंधकार की ज्योती हूँ,
दुष्टो का संघार हूँ,
निरंतरता का विकाश हूँ,
जीव में शक्ति हूँ,
ईश्वर की छाया हूँ,
मैं औरत की परिभाषा हूँ।
मैं भिभिन्नताओ का अखण्ड हूँ।।
संगठन की लिपि हूँ।
मैं औरत की परिभाषा हूँ।।

> आकाँक्षा जादौन