बुधवार, 13 सितंबर 2017

विधा....कुण्डलिया
लिखवत मिश्रण भाष्य,नीर भयो शंरवत।
हिन्दी विदेशी घुलकर,बदलो काया कल्प!
बदलो काया कल्प प्यास में कौन सो उम्वीद।
शान से चलें चौडी छाती लघु भयो गम्भीर!!
विदेशी के लपेङे में शंरवत अंजुमन की शान।
प्यास में करें त्रृप्त शंरवत नहीं नीर की आस।।
  
आकाँक्षा जादौन

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें