एक पल ठहरी नज़र मुझपर मैं ढूँव गया उनकी नज़रों में,
खुद का पता भूला ढूँडता फिरता उनका पता गलियों में.!!
मंज़िल तो खुद का भूल वैठा हूँ उनको अपनी मंज़िल बना वैठा हूँ,
वक्त की रफ्तार बड गई है या मेरे सब्र का इंतहा ले बैठा हूँ!!
खुद का पता भूला.......पता गलियों में
फिरती है झलक बस उनकी मेरी आँखो में अपना नाम भी भुला वैठा हूँ,
मिल जायें एक वार पूछूँ तो ऐसा क्या किया जादू तेरी जादू में खो वैठा हूँ!!
खुद का पता भूला .....पता गलियों में
खिलते ओठ सरमाती अदा जुल्फो की बरसती घटा यादें ही याद कियें वैठा हूँ,
उतरता नहीं उसका असर दवा उसी से लेने की दुआ किये वैठा हूँ!!
एक पल ठहरी नज़र मुझपर मैं ढूँव गया उसकी नज़रों में....
खुद का पता भूला ढूँडता फिरता उनका पता गलियों में....
खुद का पता भूला ढूँडता फिरता उनका पता गलियों में.!!
मंज़िल तो खुद का भूल वैठा हूँ उनको अपनी मंज़िल बना वैठा हूँ,
वक्त की रफ्तार बड गई है या मेरे सब्र का इंतहा ले बैठा हूँ!!
खुद का पता भूला.......पता गलियों में
फिरती है झलक बस उनकी मेरी आँखो में अपना नाम भी भुला वैठा हूँ,
मिल जायें एक वार पूछूँ तो ऐसा क्या किया जादू तेरी जादू में खो वैठा हूँ!!
खुद का पता भूला .....पता गलियों में
खिलते ओठ सरमाती अदा जुल्फो की बरसती घटा यादें ही याद कियें वैठा हूँ,
उतरता नहीं उसका असर दवा उसी से लेने की दुआ किये वैठा हूँ!!
एक पल ठहरी नज़र मुझपर मैं ढूँव गया उसकी नज़रों में....
खुद का पता भूला ढूँडता फिरता उनका पता गलियों में....
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें