मैं क्या अर्पित कर पाऊँगी,
अटल जी स्वंय चंदन बरसाते हैं।।
मैं क्या इत्र गिरा पाऊँगी,
वो स्वंय चंदन बरसाते हैं।।
मै क्या क्या लिख पाऊँगी,
वो स्वंय गाथा कह जाते हैं।।
अटल सत्य अटल तारा बनकर
क्षितिज पर भी आज चमकेगा।।
माँ भारती की सेवा में स्मर्पित
कण कण में चंदन महकेगा।।
जननी कृष्णा से पारीजात पुष्प,
बन पालन कृष्णा से निर्माण।।
25दिस्बर1924 दिन था पावन
अवतरित हुआ अटल तारा।।
मैं क्या करुँ स्वंय बना निर्माता,
कण कण में रम गयें अटल तारा।।
वटेश्वर ग्राम था ग्वालियर धाम,
प्राम्भिक शिक्षा ग्वालियर बना।।
कानपुर में स्नातकोत्तर उपाधि रमणा,
संजोग ऐसा कहाँ देखा और सुना ।।
पिता पुत्र ने साथ की कानून पढ़ाई,
कानपुर गंवाह बना ऐसा संयोग का।।
मैं क्या अर्पित कर पाऊँगी,
अटल जी स्वंय चंदन बरसाते हैं।।
धर्म,पांचजन्य,और अर्जुन संम्पादन ,
कर कार्यशैली से अवगत कराया।।
1939में राष्ट्रीय स्वंयसेवक बन कर,
कर्मपथ पर पितामाह बन युग बनाया।।
अविवाहित रहकर प्रण तृण अर्पित,
हर सांस माँ भारती को है अर्पित।।
1942में अंग्रेजो भारत छोड़ो आंदोलन,
धरा के लिए तन मन में धधक उठी ज्वाला।।
ज्वाला में कलम चल पढ़ी बनके लेखनी,
बहकर सारिता कण कण उपवन।।
मैं क्या अर्पित कर पाऊँगी,
अटल जी स्वंय चंदन बरसाते हैं।।
कुछ कर पाने की जुझाऊँ जूझने की,
चल पढ़े एक नया गाथा गड़ने को।।
पढ़ लेते थे चित मन को गड़ देते थे,
लेखनी बन अंकुर को वृक्ष बना देंते थे।।
बसते चले गयें रोम रोम सुर बसते चले,
हार नहीं मानूँगा संकल्प सच होते गयें।।
नेहरु जी के कथन बनेगें प्रधानमंत्री,
कार्यपथ पर आगें बढ़ते बढ़ते गयें।।
1975आपात काल से निकली शाखायें.
जे पी आंदोलन से उदय हुआ शौर्य।।
पित्र सत्तात्मक के पथ पर एक और,
नये पथ का अवतरित उदय हुआ ।।
1977में विदेश मंत्री बन कर दिखलाया,
संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिन्दी का वर्चस्व।।
वक्ता बनकर सर्वशक्ति का मान बढ़ाया,
सुन्न थे पक्ष विपक्ष अघोष थे शब्द।।
मै क्या अर्पित कर पाऊँगी,
अटल जी स्वंय चंदन बरसाते हैं।।
तीन बार प्रधान मंत्री बनकर,
अखण्ड़ भारत को सूत्र में बंधाया।।
वक्ता बन शब्द दर शब्द कहते थे,
श्रोता बन स्थिर होकर नमन करते थें।।
अमेरिका से छुपकर दृढ़ दिखलाया,
कलाम के साथ पोखरण में कर कर।।
मई 1998में परीक्षण कर बतलाया ,
शक्तकरण हो गया है भारत का।।
शस्त्र भण्ड़ार में परिमाणु जोड़कर ,
संसार को अचरज कर मनोवल वढ़ाया।।
आभा थी शानदार दमदार थी आवाज,
चित स्थिर हो जाता चेतना को जगाया।।
अजातुशस्त्रु बनकर किया अटल सत्य ,
प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी।।
भारत रत्न से बढ़कर क्या दे पायेगे,
अटल स्वंय बनकर चंदन बरसातें हैं।।
मैं क्या अर्पित कर पाऊँगी,
अटल जी स्वंय चंदन बरसाते हैं।।
अटल सत्य अटल तारा बनकर,
क्षितिज पर आज चमकेगा।।
मैं क्या इत्र गिरा पाऊँगी,
वो स्वंय चंदन बरसाते हैं।।
मैं क्या क्या लिख पाऊँगी,
वो स्वंय गाथा कह जातें हैं।।
बार बार करती हूँ नमन नमन,
श्रंद्धा अर्पित कर शब्द कह पाई।।
अटल सत्य अटल सत्य......
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