नरसंघार देखकर भारतियों का,
खून न पिघले वो पानी हैं।
हम तो सुरक्षित आवाद हैं,
जिनकी उजडी बस्ती हैं।
उनसें क्या लेना देना मेरा,
आने वाली खतरे की घंटी है।
आज उनके बुझे चिरांग,
कल क्या पता हमारी वारी हों।
नरसंघार सुनकर बहरे हुए,
इतियास दुहरा रहा पदचाप है।
जव जव ठण्डा हुआ खून,
तव तव विदेशी सिंगजा जकडा हैं।
आई सी आई ने भाप लिया हैं,
नरसंघार पर करते राजनीति हैं।
आम जनता भी सोई हुई हैं,
हम है सुरक्षित औरो से क्या नाता।
यही खामोशी ही है,
वढे शंकट की आहट हैं।
जाग जाओ सोने वाले ,
फिर रोओगे पछतावोगे।
इस वार आया गजनी,
अस्तत्व ही मिट जायेंगा।
एक छत्र होगा राज,
एक ही धर्म सबका होगा पतन।
समूह में होगा नरसंघार,
नारियों का होगा जौहर।
आत्मा होगी तार तार,
ऐसा दृश्य दुहरायेगा।
आरक्षण की ललक पाने को,
कोहराम खूव मचाते हों।
घाटी में काले झण्डे फहराते हों,
देश द्रोह नारे खूब लगाते हों।
कभी भारतिय होने पर भी,
इस नरसंघार पर उवाल लाओ।
चका जाम,काला शोक ,
शेरो सी दहाड दिखलाओ।
बतलादो विदेशी, नेताओ को,
जो खोये है हमने हमारा ही कतरा।
विगुल फूक दो देशद्रोह के खिलाफ,
जो ऐसी राजनीति करेगा,
वो सत्ता का अधिकार नहीं।
जो देशद्रोह के नारे लगायेगा,
उसका पण्डुचेरी में हो कालापानी,
ऐसा कठोर निर्णय हो पालन।
तव होगा भारत स्वाभिमान,
विषैले सर्प का कुचलो फन।
अव शांती नहीं उवाल लाना हैं,
देश की माँग ही नही अपनी आन है,
शोर्य दिखाने का आया मौका।
खून ठण्डा नहीं उवाल दिखाना है,
गीदड नहीं शेर की दहाड दिखाना हैं।
खून न पिघले वो पानी हैं।
हम तो सुरक्षित आवाद हैं,
जिनकी उजडी बस्ती हैं।
उनसें क्या लेना देना मेरा,
आने वाली खतरे की घंटी है।
आज उनके बुझे चिरांग,
कल क्या पता हमारी वारी हों।
नरसंघार सुनकर बहरे हुए,
इतियास दुहरा रहा पदचाप है।
जव जव ठण्डा हुआ खून,
तव तव विदेशी सिंगजा जकडा हैं।
आई सी आई ने भाप लिया हैं,
नरसंघार पर करते राजनीति हैं।
आम जनता भी सोई हुई हैं,
हम है सुरक्षित औरो से क्या नाता।
यही खामोशी ही है,
वढे शंकट की आहट हैं।
जाग जाओ सोने वाले ,
फिर रोओगे पछतावोगे।
इस वार आया गजनी,
अस्तत्व ही मिट जायेंगा।
एक छत्र होगा राज,
एक ही धर्म सबका होगा पतन।
समूह में होगा नरसंघार,
नारियों का होगा जौहर।
आत्मा होगी तार तार,
ऐसा दृश्य दुहरायेगा।
आरक्षण की ललक पाने को,
कोहराम खूव मचाते हों।
घाटी में काले झण्डे फहराते हों,
देश द्रोह नारे खूब लगाते हों।
कभी भारतिय होने पर भी,
इस नरसंघार पर उवाल लाओ।
चका जाम,काला शोक ,
शेरो सी दहाड दिखलाओ।
बतलादो विदेशी, नेताओ को,
जो खोये है हमने हमारा ही कतरा।
विगुल फूक दो देशद्रोह के खिलाफ,
जो ऐसी राजनीति करेगा,
वो सत्ता का अधिकार नहीं।
जो देशद्रोह के नारे लगायेगा,
उसका पण्डुचेरी में हो कालापानी,
ऐसा कठोर निर्णय हो पालन।
तव होगा भारत स्वाभिमान,
विषैले सर्प का कुचलो फन।
अव शांती नहीं उवाल लाना हैं,
देश की माँग ही नही अपनी आन है,
शोर्य दिखाने का आया मौका।
खून ठण्डा नहीं उवाल दिखाना है,
गीदड नहीं शेर की दहाड दिखाना हैं।
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