शनिवार, 31 मार्च 2018

बरवाद न कर

वक्त की नील को वरवाद न कर .....यह देखने में कि रंग की धार कैसी है? कुछ फलसा लिख ऐसा कि मुक्कमल जहाँ तेरा तलवदार हो जायें...वाह। की दाद में तेरे भी नजरदार हो जायें....गुजर गया वक्त रंग की धार देखने में...तेरा जीवन भी बिना किस्सा के न पढ सकें वो लिखावट रह जायें....

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