समाज दर्पण
शनिवार, 31 मार्च 2018
लहरो को क्या ताँकना
कंगार पर खङे होकर लहरो को क्या ताँकना,होशलो की उङान को सपनो से क्या बाँधना,माझी सा हुनर हे तो मुकाम तो दो, पंखो को खोलकर उङान तो दो.....,एक नया इतियास को ......अपने नाम का मुकाम तो दो.....।
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(तृतीय अंक नंदी महाराज)
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