सोमवार, 28 मई 2018

भविष्य दलदल

नवयुवक का भविष्य दलदल में फसाँ,

घर घर बैरोजगारी की सहता मार!!

हर  काम  घूस   के         है      नाम,

बिकता     ईमान   टंका   के दाम!!

डिगरी बिची चन्द    रुपयों   में,

किया कर्मचारी में भविष्य उज्ज्वल !!

देश की पतवार   जिसके  हाथ,

पङा रास्ते का तनिष्क पत्थर!!

हरी पत्ती में बन गया मास्टर,

टयूशन  को  बनाया रोज़ी रोटी!!

बच्चो का   सपना  इसी में देखा,

बिखरे  पत्तो  से बनाया  घरौधा!!

बस स्टोप पर चाट पकौङे बेचे,

घर घर   जाकर  बेचा  सामान!!

फ़ुटपाथ  पर कपङे  वर्तन बेचे,

घर घर जाके फैका  अखवार!!

बदली पहचान  नौकरी की खातिर,

ब्राहमण ठाकुर बदल के लिखा जाट!!

सिफारस में नेताओ से जोङा रिस्ता,

बदली  पहचान  लिखा    हैं नाम!!

पूर्वजो  की पूंजी  गिरवी  है रखी,

मित्रो रिस्तेदारो से लिया हैं धन!!

रख दी  छत  साहूकारो के हवाले,

साहूकारो से  लिया  हैं व्याज!!

सरकार  गिरी  मकान हुआ नीलाम,

मित्रो रिस्तेदारो से टूटा  है रिस्ता!!

साहूकारो    ने    लिखी   जमींन ,

लगता    सबको झूठा  किस्सा !!

मजबूरी में   इंसान  बना हैवान,

आंतकवादी  डाकू का बना सदस्य!!

लूटपाट हर तरफ़ कोहराम छाया,

छूटा  इंसान  बना महा दानव !!

पकङ  गये  उम्रकैद झूला  फाँसी,

मिल्ट्री की  गोली  का हुआ शिकार!!

सात पुस्तो  पर लग लया  है दाग,

धुला  नहीं है बना हुआ  निशान!!

धरा के नेत्रो  से बहता  पानी,

सच  होती  रही  है कहानी !!

तम  में   घिरा है भविष्य  ,

रोशनी  विखेरे   मेरी  जुवानी !!

आकाँक्षा जादौन

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